डर

।।डर।।

प्यार था पर प्यार मे इन्तकाम का डर था ।।
जो मिला बस उसी इल्जाम का डर था ।। 1

वरना फिक्र न करता मैं भी वफाओ की ।।
जो हुआ बस उसी अंजाम का डर था ।। 2

तभी तो रह गये किनारों पर डूब कर ।।
नाम भी तो न मिला बदनाम का डर था ।। 3

औरों ने तो जी लिया खुशहाल जिंदगी ।।
मैं ढह गया जबकि मुझे ईमान का डर था ।। 4

ऐ दोस्त !! अब मत डर जीने से जिंदगी ।।
मैं रह गया क्योंकि मुझे अरमान का डर था ।।5

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