रह जाएंगे प्रेम तेरे लिखे गीत मेरे

सूनेपन की गरज-बरस में मन मेरा भीगे
रिमझिम बारिश की टप-टप बूँदों में
तू आ जा आकाश की ओढ़नी ओढ़े

सिमट-लिपट कर मुझे सुला तू
हृदय की दीवारों में दबा गीत सुना तू
मीत रे! दिव्य स्वर का गीत सुना तू

जाने कितने आते-जाते रहें भंवरे
उन्माद मन के कोने-कोने में लिये
मधु और मधुर पंखुड़ियों के लिए

जब आएगी इधर पतझड़ की बयार
कहाँ उड़ गए छोड़ तेरा स्नेह संसार?
क्यों न रहें संग में इस मंझधार?

सुन रही मेरे प्राणों की बांसुरी का गीत?
गुंजन में नाम केवल तेरा ही नित-नित
नित तेरी यादें तेरा सपना सांची रे मीत!

विश्व के इन चित्रों से क्या बात करूँ?
तुझे देखने के बाद आँख बंद कर सकूँ
कुछ और न दिखे पूर्व ही सो जाऊँ

प्रीत मेरे! बिन तेरे आती न निंदिया मुझको
निशी की नीरसता में कहाँ-कहाँ ढूंढू तुझको
किसी दिशा की हवा के संग आ अब तो

तेरे-मेरे प्राण न होंगे उन दिन-रातों में
तू कोमल सी होगी किसी किताबों में
रह जाएंगे प्रेम तेरे लिखे गीत मेरे

– नीरज सारंग