वही गीत गुनगुनाने दे

बीते हुए लम्हों के गुलदस्ते मैं यादो को सजाने दे !
ऐ दिल मुझे आज फिर से वही गीत गुनगुनाने दे !!

मुझे देख खनकाई थी चूड़ियाँ पहली बार छन से
वही मधुर संगीत कानो में फिर से घुल जाने दे
उन पुरानी यादो की महफ़िल एक बार सजाने दे
ऐ दिल मुझे आज फिर से वही गीत गुनगुनाने दे

छेड़ी थी ग़ज़ल सावन की घटाओ ने उनके सजदे मैं
रुत ले रही थी अंगड़ाई मचलती हवाओ के साये मैं
बारिश की उन बूंदो की झड़ी फिर से लग जाने दे
ऐ दिल मुझे आज फिर से वही गीत गुनगुनाने दे

बसंती बहार थी जब नयन से नयन टकराये थे
शर्म से झुकी थी नज़र तुम धीरे से मुस्कुराये थे
मिलन की बेला में ठहरे उन पलो को लौट आने दे
ऐ दिल मुझे आज फिर से वही गीत गुनगुनाने दे

ढल जाया करती थी शाम, तेरी जुल्फ गिराने से
चटक जाते थे जाम मयखाने के तेरे रूठ जाने पे
गिरे थे आंसू शबनमी गगन से भी तुझे मनाने में
ऐ दिल मुझे आज फिर से वही गीत गुनगुनाने दे

बज उठती शहनाइयां वीराने में तेरे आ जाने से
झूमने लगती बहारे गुलिस्ता में तेरे मुस्कुराने से
आज फिर मुझे उन बीती तन्हायो में खो जाने दे
ऐ दिल मुझे आज फिर से वही गीत गुनगुनाने दे

बीते हुए लम्हों के गुलदस्ते मैं यादो को सजाने दे !
ऐ दिल मुझे आज फिर से वही गीत गुनगुनाने दे !!

—-:: डी. के. निवातियाँ ::—-

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