मेरा हर गीत सुमन सज जाने दे

जो गीत हृदय की फूलवारी में है खिला
हे प्रभु! गिरने से पूर्व उसे तोड़ ले
तेरे पग-धूलि की घनी वाटिका में
मेरा हर गीत सुमन सज जाने दे
गीतमाला को स्पर्श कर मान न बढ़ा
भले ही अश्रुजल से सींचा है मैने
भले सम्पूर्ण सौन्दर्य नेत्र-नीर में बहा
उन्हें तेरे पग-धूलि-तल में ही स्थान दे
हे महाकवि! झुका ले मेरी कवितायें
मन टूटने से पूर्व मुझे तोड़ भी ले
नयन के मेघ का शेष जल है चंचल
तेरे पग-पुष्प को धो ही लेने दे

– नीरज सारंग

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