वीरों के गुण

वीर विवेक, बल, ज्ञान धनी, कुछ अचरज क्या कृपाण तनी ।

पी लेते लहू पिशाचों का, रहे रक्त मंडित तलवार सनी ।।

यूँ न धरो तुम धार कंठ, सब चुप है जब तक, वे न सुनी ।

फिर हस्त तुम्हारा हस्त न हो, कंठ तुम्हार रहे न तनी ।।

अरुण जी अग्रवाल

2 Comments

  1. nitu 29/11/2014
    • अरुण अग्रवाल अरुण अग्रवाल 29/11/2014

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