गीतो को बुन पाता

गजर इतना कि तेरी आवाज़ सुन नहीं पाता

कहर इतना कि तेरे सुरों को चुन नहीं पाता

तेरी आग़ाज़ सुनकर काश मै होता पैदा, कबर में और न लटकता गीतों कों बुन पाता

दिल में भँवर न उठते, दिल होता पीर धडकन का ताल न चुकता सासों की धून पाता

क्या जलता क्या बुझता क्या जरामरन किचड मे और खिलता, कमल के गुण पाता

शोर अगर सारे, होते रव में तबदिल गुंजता गुलजार होता, मिलन का जुनून पाता

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