मुक्तक

पलक झपकते ही मौषम बदल जाए वहीँ
मुस्कराहट है ऐसी फूल खिल जाए वहीँ
मधु जैसी बोली उनकी हिरणी जैसी चाल है
तिर्छी नजर कुछ ऐसी है पत्थर पिघलजाए वहीँ
२२-११-२०१४

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