नकाब में चाँद

लाजवाफ था बिना दस्तक दिए आना तेरा
कहो क्या राज था बिना बताए जाना तेरा

क्यों लेती हो आखिर इम्तहान मेरे मुहब्बतका
अब नहीं चलेगा कोई भी बहाना तेरा

हम तो कब से हुए है तेरी गुलाम जालिम
अब सहा नहीं जाता इन्तजार में सताना तेरा

जैसे कोई चाँद छुप जाती है काले बादल में
वो खुसनुमा चेहरा नकाब में छुपाना तेरा

दीदार के लिए रह गई नसीब सिर्फ ख्वाब में
उठेगी जनाजा बन्द न हुई गर तड़पाना तेरा
२१-११-२०१४

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