नाम जिसका गांधी था

पतला दुबला सा था वो, नाम जिसका गांधी था I
आजादी के महाकुम्भ मैं, बदलाव की आंधी था II

सत्य,अहिंसा,और प्रेम से जिसका गहरा नाता था I
उठे कदम जिस ओर, सारा देश वही मुड़ जाता था II

सूखे तन पर धोती पहने, लाठी लेकर चलता था I
जिसकी ताकत से अंग्रेजो का सिंहासन हिलता था II

सादा जीवन उच्च विचार, शाकाहारी भोजन खाता था I
किया विदेशी वस्त्र त्याग खुद चरखे से सूत काता था II

सत्यग्राही, अभियान चलकर अंग्रेजो को हराया था I
मजबूर होकर गोरो ने भी गांधी को शीश नवाया था II

लन्दन में की पढ़ाई फिर बैरिस्टर बन कर आया था I
दक्षिण अफ्रीका में भी ताकत का लोहा मनवाया था II

जात-धर्म ओर भेदभाव को जिसने सदा नकारा था I
छुआछूत ओर रंग भेद मिटा, लोगो में भाईचारा था II

पटेल, सुभाष,आजाद, भगत,लाल,तो नाम से कोई लाला था I
नेहरू, प्रसाद, बिस्मिल, मौलाना, सबने ही उसे गुरु माना था II

ऐसी भरी थी हुंकार जिसने अंग्रेजो को ललकारा था I
संधि करने को फिर अंग्रेजो ने इरविन को उतरा था II

मान चुकी थी जिसको दुनिया,पर अपने ने नकारा था I
साबरमती के संत को गद्दारो ने मौत के घाट उतरा था II

मरा नहीं वो अजर अमर है, मातृ भूमि का प्यारा था
नमन उस महापुरुष को,जो सबकी आँख का तारा था

—::– डी. के. निवातियाँ –::—