“”””मैं कौन हूँ””””

इस अनजानी दूनीया मे अनजान,,,,,
“मै कौन हू”,,,,,,,,,,
इन समझदारो की भीड़ मे एक नादान,,,,,
“मै कौन हू”,,,,,,,,,,
सच्चाई का चोला ओढ़े दगाबाज़ो सँग खड़ा हो रहा बदनाम,,,,,
“मै कौन हू”,,,,,,,,,,
चारो ओर से घिरा दूष्कर्म,अत्याचार मे देवता या शैतान,,,,,
“मै कौन हू”,,,,,,,,,,
ऊच-नीच की परम्पराओ मे दबा हुआ अदना या महान,,,,,
“मै कौन हू”,,,,,,,,,,
दबंग-दुराचारीयो की इस दूनिया मे अधर्मी या दयावान,,,,,
“मै कौन हू”,,,,,,,,,,
चरित्रहीन नीर्गुणी मान्यताओ मे नीर्बूद्धी या गुणवान,,,,,
“मै कौन हू”,,,,,,,,,,
बन्टी “विकास”माहुरे