खून भरे जमाने

कमलों के बीच अब
मेंढक टेर्राने लगे हैं
निष्कासित भी अब
जीत शंख बजाने लगे हैं

तुम मेघ बनकर हुंकारों
त्रिशूल बरखा संग आने लगे हैं
ये इल्म ना हो काफ़िर को हम
बातों में वक़्त गवाने लगे हैं

तुम यों ना बैठो किंकर्त्तव्येमूढ़
वो इतिहास को दोहराने लगे हैं
ये थाल मोती का भरने में
खून भरे जमाने लगे हैं

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