खुशबु

बिखरी है जो खुशबु इर्द-गिर्द क्यों ढूंढे उसको सारे जहान मै !
वो निकली है मेरे बदन से,जो अब रुक नही सकती हिजाब से !!
ये दुनिया क्या जाने एक दिन हमने छुआ था उस गुलाब को !
जो महकता है इस गुलशन मैं सिर्फ और सिर्फ तेरे ही नाम से !!

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