गांधी नहीं बन सकूंगा

अब मैं आपको
आपबीती बताता हूँ
क्रोध के प्रभाव का
विस्तृत रूप समझाता हूँ

आप भी सही हैं और
आपका का तरीका भी
शालीन हैं शब्द भी
बोलने का सलीका भी

जब कोई खुद गलत
वक़्त पर आता है
आपको काम करने का
तरीका समझाता है

आपको वक़्त से ज्यादा
काम करना चाहिए
वो भी प्रभावी है आपको
नहीं भिड़ना चाहिए

दिल आपका टूटता है
भावना आहात होती है
सुबह से की हुई बेकार
सब मेहनत लगती है

आप भी अपशब्दों से
क्रोध में आ रहे हैं
लोग सोच रहे होंगे
पद का प्रभाव दिखा रहे हैं

अब वो देख लेने की
धमकी देकर जा रहा है
आपका क्रोध भी सीना
आपका जला रहा है

आप सोचते होंगे उससे
मैं कैसे झुक सकता हूँ
अब उसका मैं क्या क्या
कर सकता हूँ

सोचते सोचते बहुत
तरीके नज़र आते है
ऐसा करते करते कई
घंटे गुजर जाते हैं

जब गुजरी रात सुबह
आईने से से बतलाते हैं
बदला लेने की सारे तरीके
गलत नजर आते हैं

फिर भी कश्क है कि
उसका कुछ जरूर करूंगा
कितना भी उठ जाऊं लेकिन
गांधी नहीं बन सकूंगा

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