प्यारा नहीं हूँ फिर भी

प्यारा नही हूँ फिर भी, दुलार देता कोई
भरपेट सासे जीवन की ,मुझसे लेता कोई

बाहो के घेरो मे सिमटता कोई
तन्हाई मे मुझसे लिपटता कोयी
हर पल है जीना मौत से बेखबर
पास भगवन मेरे ,बैठता है कोयी

भुजाओ को मेरे छाटता कोयी
अस्थीयो को मेरे काटता कोयी
औरो के लीए मरना, यही है जीना
जीते जी अंग मेरे बांटता है कोयी

चारा हूं मै मुझपे पलता है कोयी
देखकर मुझे राह चलता है कोयी
राख मेरे बिना तेरी, होने न पाये
तेरे संग जो जलता है, मै हूँ वही

रचनाकार/कवि~ धिरजकुमार ताकसांडे

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