चिट्ठी और मोबाइल

वो दिन भी क्या दिन थे,
जब चिट्ठी लिखी जाती थी l
प्यार की झलक उसमे साफ़ नज़र आती थी ll
इंतजार रहता था उस चिट्ठी का l
जिसके आते ही पढ़ने की होड सी लग जाती थी ll

उसमे लिखे शुरू के शब्द,
आज भी बहुत याद आते है l
की हम सब यहाँ कुशल-पूर्वक है और
आपकी कुशलता भगवान से नेक चाहते है ll

समय के साथ लोगो की सोच में बदलाब आया है l
अब हर तरफ मोबाइल ही मोबाइल छाया है ll

आज व्हाट्सप्प और फेसबुक का ज़माना है l
क्योंकि आज पल भर में अपनी बात पहुँचाना है ll

मोबाइल का जादू इस कदर छाया है l
इसने लोगो को अपना गुलाम बनाया है ll

जहाँ इसने दो देशों की दूरियाँ मिटाई है l
वहीं इसने लोगो के मन में दूरियाँ बड़ाई है ll

अब पल भर में कोई अपना बन जाता है l
दूसरे पल देखते ही देखते वो भी कहीं खो जाता है ll

इंतजार के वो मीठे पल ना जाने कहाँ खो गये l
चिट्ठी में छिपे प्यार से तो बेगाने भी अपने हो गये ll

पलभर में मोबाइल से हज़ारों मैसेज तो भेज पाओगें l
किन्तु चिट्ठी में छिपे प्यार के उन शब्दों को कहाँ से लाओगे ll

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