विवेकानंद

हे परम युवा, सिद्ध योगी
ब्रह्मचारी ,परम ज्ञानी
राष्ट्रभक्त ,राष्ट्र्पूत
विवेकानंद स्वामी

राजा रंक कोई जड़ मति
सबका तूने उद्धार किया
शिकांगो में हे संत तूने
सनातन का झंडा गाड़ दिया

नारी शिक्षा, नैतिक आचार
सेवा को आधार किया
बोध कराया हिंदुत्व का
हिंदी का प्रचार किया

शिक्षा को अर्थ धर्म का
चरित्र धर्म का मूल कहा
धार्मिकता को सत्यस्वरूप
भौतिकता को स्थूल कहा

उठो जागो चलते रहो
मंजिल तक आव्हान किया
पूजा गुरुपद को तुमने
संस्कृति का सम्मान किया

आत्मबल और पुण्यता का
तुमने प्रत्यक्ष प्रमाण दिया
हे महऋषि तुमने धर्म पर
अपना जीवन कुर्बान किया

वासुदेव कुतुम्ब्कम का
विस्तृत प्रचार किया
निर्धन भी लगाया गले से
भाई बहिन करार दिया

हे दिव्य आत्मा, हम बालकों को
आकर फिर जगा जाओ
विवेक से आनंद देने वाले
विवेकानंद फिर आ जाओ

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