हूई है मानवता कि हार . . . . .

अतिशय लिप्सा भौतिकता की
किया घृणित ब्यापार
नाश कि मानव मुल्यो को
किया अक्ष्म्य अपराध
हूई है मानवता कि हार
मनोविकार और अपसंस्कृति का
दर्शन दिया सकार
रुँध गए हैँ धर्म मार्ग सब
इसपर कृपा आपार
हूई है मानवता कि हार
ब्यवहार ज्ञान कर्तब्य धर्म का
शिक्षा किया बेकार
तप त्याग सेवा कि दीक्षा
का कही नही आधार
हूई है मानवता कि हार
आलोकित हो जीवन कैसे
इसपर करो विचार
करो निराला काम ‘विवेक’ से
बच जाए संसार ।
हूई है मानवता कि हार . . . . .
डा विवेका नन्द मिश्र
डा विवेकानन्द पथ
गोल बगीचा , गया
9431207570

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