“आँखी ला खोलके जागवं”

आँखी ला खोलके जागव->कहिथे हमर देश हा जागत हावे,कोन जनी ये क उन कोती भागत हावे,कभु गुरू अ ऊ कभु कसाब, कभू करय धरना ले बर काला धन के हीसाब,कहू कहिथे बदलव देश के लोकतंत्र, जतका मनखे वतके मुहू मा मंत्र,ये क ईसन जग ई हे सँगवारी,ज उन ला देखव ओखरे अलग लड़े के हे तैय्यारी , कोनो काला धन ता कोनो तिरिया उत्थान के मन बनाये हे, ता कोनो बहत नँदीया मा मारे नहाये हे, ज उन लड़तहे अपन काम बुता ला तज के वोहा लड़तेच हे, अउ होशीयार मन इही लड़ाई मा राजनिती,मिडिया मा नाव कमाके धन बनायै हे,अरे जागव 1संघरा चाहे क ईसन भी जागव,फेर ये भारत देश मा नवा अंज़ोर के बिहान लादव,
,,,,,,,,,,,,,,,बन्टी”विकास” माहुरे,,,,,,,,,,,

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  1. बन्टी "विकास" माहुरे बन्टी "विकास" माहुरे 18/11/2014

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