” ग़ज़ल “…….याद आज भी है

” ग़ज़ल “

तुमसे मिली थी नज़र पहली दफा याद आज भी है I
झुकी-२ नज़र का धीरे से मिलाना याद आज भी है II

वो मंजर भी अजीब था तेरे मेरे पहले मिलन का I
सलाम को हिले थे लब पहली दफा याद आज भी है II

शर्म से झुके हुए थे नयन,सुर्ख चहरे पे टपकी मुस्कान थी I
तेरा सर पे वो गुलाबी दुपट्टा लगा के आना याद आज भी है II

बंद कमरे मैं बैठकर आमने सामने हुई थी आँखे चार I
उस दिन चला था बातो का सिलसिला याद आज भी है II

निभाई थी हमने कुछ रस्मे, उस दिन दस्तूर-ऐ-जमाने की I
किये थे साथ-साथ चलने के जो कसमे-वादे याद आज भी है II

यू तो मिलते है आज भी हर रोज़ हम दो किनारो की तरह I
मगर उस ठहरे हुए लम्हे की कसक मुझे याद आज भी है II

चले थे बनकर अजनबी हम अनजान डगर के सफर में I
बसा लिया था एक जहान तेरे नाम से वो घर आज भी है II

साथ कब तक है संग-संग न मालूम हमें तो न सही I
मीठी यादो का बसेरा दिल में एक दूजे के बाद भी है II

तुमसे मिली थी नज़र पहली दफा याद आज भी है I
झुकी-२ नज़र का धीरे से मिलाना याद आज भी है II

……………………डी. के. निवातियाँ