अस्तीत्व जान लेता

तिनके सी दिखे जींदगी मुझे निगाहो से दुर होकर देख लेता मै तुझे नजारो से

हर बुंद हो गयी हवा, उतरकर आँखो सें हर मौज छु गयी, पलकों की किनारो से खुशबु की तरह फुलो से खो गयी तमन्ना जीना सीख लेता, उन बुझे चिरागो से

हर साँस हो गयी धुवाँ, निकलकर सीने से हर प्यास पी गयी, सपनो को सागरो से बारीश की तरह बादलो से रो ली आशा जींदगी जान पाता, अस्थी बुझे मजारो से

हर आस टूटी, अंधी सनम की बाहो में
हर शर्म जी उठी, जांनीसा की नफरतो से रुह की तरह जीस्म से खो गयी उमंग अस्तित्व जान लेता, प्यार की गहरायी से

रचनाकार/कवि~ धिरजकुमार ताकसांडे

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