झांकना जरुर

झांकना जरुर, नजर आया तो
नजर उतार लो, अगर पाया तो

दसो दिशाओ में लेना परवाज
संगीत उतर आयेगा अगर गाया तो

दवाँओं का असर भी देखना जरुर
तबियत सुधर जाएगी अगर खाया तो

ढुढं ले घर का हरेक कोना
दाया भी होगा, अगर बायां तो

बेशक खोदना गूरूओं की कबर
उजड़ जाएगा, अगर बसाया तो

तोड दिल खुदा का, रूबरु उसके
दुल्हन बनी धरती, अछुता फल खाया तो

करुणा से छु लेना धरती
जनम आयेगा, अगर मिटाया तो

रचनाकार/कवि- धिरजकुमार ताकसांडे (९८५०८६३७२२)

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