तेरे बीना

मौत को है जिंदगी से छिना मैने
सिख लिया तेरे बिना जीना मैने

रंगो मे रंग है चाहना अभी
देख ली तेरे हाथो की हिना मैने

बहती हवाओं से हिफ़ाज़त क्या कर लेना खेना है नाव अब बादबानो के बिना मैने

इस सिरे से उस सिरे तक जाना मुझको
ना कहना कि की है किससे कीना मैने

उंचे आसमान मे है अब बेलगाम कूदना छोड दिया है जख्मों को सीना -पीरोना मैने

अपने ही आप में हूँ संग दिल इतना
पता नहीं कब देखा था आईना मैंने

जन्नत जो पायी है अभी और यही
तो फुलों का सार क्या पीना मैने

तु लाख दिखा रंग अपने जमाने में तेरे
पर तोड दीया तो तोड दिया है पत्थर का वो नगीना मैने

रचनाकार/कवि- धिरजकुमार ताकसांडे (९८५०८६३७२२)

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