जब कभी हो हार

जब कभी हो हार समझो सफलताका है सार
इन्सा है तु जानवर नही करना मत इन्सापे वार
आदमी है ना की भगवान उसके भरोसे ना हो नैया पार
सुख को छोड, दुख ना होगा भगादे आते जाते मार
सुंदरता उभरेगी जहाँ मे गर कम्म हो कुशल हजार
खुद का दिया जला लेना धम्म का है यही तो सार

रचनाकार/कवि- धिरजकुमार ताकसांडे (९८५०८६३७२२)

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