मर्म

मै देखता हुॅं
गली में आजकल
बच्चे नहीं ख्ेालते
सतोलिया, मारदडी या छुपम छुपाई का खेल
नही करते आसमा छुुने की बाते
चांद को खिलौना बनाने की
भुलचुके है राजा रानी की कहानिया
परियो की कथा
गीता के श्लोक तुलसी का मानस
नही जानते क्या है संध्यावंदन
आप नही लुभा सकते
उन्हें देकर चवन्नी की फांक
मुठ्ठी भर मखाने
जान गये है वो जीवन की सच्चाई
ईश्वर है भ्रम धोखा है कर्म
झुठ छल फरेब जैसे भी हो
लेलो जीवन के मजे
क्योंकि जीवन बहुत छोटा है
नैतिकता में टोटा ही टोटा है
क्या जिंदा रहना ही है मानव का धर्म
क्या है जीवन का मर्म

अजीत सिंह चारण