झोली भर रहा हूँ

नाम तेरा ले लेकर मै, झोली भर रहा हुँ
नजरो से मै अपने उतरकर मोम झर रहा हुँ

अपने नाम से मांगु कुछ, इतनी भी ललकार नहीं
दे ना दे दुनियावाले, लेने से डर रहा हुँ

रोशनी का क्या करु मै, राह गुज़र अंधेर है
व्यर्थ तेरा दिया चुराके गुनाह कर रहा हुँ

राजा के घर जनम ना लेना, अच्छा शगून है
सादा जीवन जीने से ना नुकर कर रहा हुँ

ओढ़कर कफन युं तो, मै जी लू हजारो साल
वैसे भी औरों की तरह मै काफी मर रहा हुँ

रचनाकार/कवि- धिरजकुमार ताकसांडे (९८५०८६३७२२)

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