ग़ज़ल

आएँ वो इस बार कही से,
लेकर प्यार का तोहफ़ा।
झूम उठा मन लाली छाई,
स्नेह मिलन का मौका।।
आएँ कुछ आँसू आँखों से,
नहीं यह कोई धोका।
आएँ वो इस बार कही से,
लेकर प्यार का तोहफ़ा।।
बदल गई मन की मिथ्याएँ,
मचल उठा एक झोंका।
प्रेम विरह की लड़ी टूट गई,
आया पावन मौका।।
खिल उठे हैं कमल नयन ,
सावन का समझो झोंका।
आएँ वो इस बार कहीं से,
लेकर प्यार का तोहफ़ा।।
जिनकी राहे देख देखकर,
मन को कितना रोका।
मिले अचानक अब इस पथ पर,
और अश्कों को सोखा।।
ना रख कोई संशय मन में,
दिल को मैनें टोका।
आएँ वो इस बार कही से,
लेकर प्यार का तोहफ़ा।।
तोहफ़ा ना था सिर्फ़ फूलों का,
उसमें दिल का हाल लिखा था।
वो प्रेम रंग की अनुभूतियाँ,
मिलन बिछोह का सार दिखा था।।
जी भर उसको गलें लगाया,
अनमोल मुबारक मौका।
आएँ वो इस बार कही से,
लेकर प्यार का तोहफ़ा।।
कवि-अनमोल तिवारी”कान्हा”कपासन जिला-चित्तौडगढ9694231040 & 8955095189