मेरे भारत की छटा बड़ी निराली है

मेरे भारत की छटा बड़ी निराली है
यंहा अंधे भक्तो की भीड़ भारी है
सत्य, असत्य से सरोकार किसे है
सब सुनी सुनाई पेलने के पुजारी है

अपनी-२ पसंद नेता के सब भक्त बने है
देखते हुए करतूत भी सब अंधे बने खड़े है
देख बुराईया उनकी,कुछ बोल नहीं सकते
क्योकि हो अंधे भक्त सब गूंगे बन पड़े है

पुरखो की शिक्षा शायद अब काम आई है
तभी तो प्रेम से मीठा बोल नीति अपनाई है
गुंडों को मोहक वाणी से जनता भरमाई है
इस अदा मैं फँसकर सदियों से जान गवाई है

क्या कहे अनपढ़ लोगो की यंहा तो,
पढ़े लिखे लोगो ने भी बुद्धि गवाई है
बन कर अंधे भक्त अंगूठा टेको के
खुद अपने हाथ अपनी लुटिया डुबाई है

फिर भी देखो यंहा कितनी समझदारी है
मिलते है दोस्तों की तरह एक दूजे से
पर दिलो में सबने दूजे से नफरत पाली है
क्योकि यंहा अंधे भक्तो की भीड़ भारी है
इसीलिए मई कहता हु मेरे दोस्तों की ,
मेरे भारत की छटा बड़ी निराली है – २ !!