तेरे वादों के दीये

मेरे साथ बुझे
तेरे वादोँ के दिये
मैँ कहीँ और चला
राख दिल की लिए

मैँ इस जहाँ का हूँ
ये जहाँ मेरा नहीँ
न जाने क्या था
जो रहा मेरा नहीँ

टूटते हुए एक
खुशनुमा नजारा था
आसमाँ की बिसात पर
बीछा हुआ सीतारा था

कुछ दर्द मैँने
चाँद के भी ले लिए
मेरे साथ बुझे
तेरे वादेँ के दिये

मिलन का मौसम
अब आने से रहा
दरिया दिल आखों के
मुहाने से बहा

ये जमीं प्यासी हैै
गगन प्यासा है
लाख सावन बहाके
नयन प्यासा है

सफीना लेके अकेले
भँवर में चल दीय
मैं कहीं और चला
राख दिल की लिय……
मेरे साथ बुझे
तेरे वादों के दीये…….

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