रेल का फाटक

छुटपन में या कहिये बचपन में, जब कभी कार में या बस में, होता था सफर पर, काली कालीन सी सड़क पर, चाहता था, गुजरे सामने से,
रेलवे लाइन, सड़क के आर पार,फाटक बंद हो,
पटरियों पर सरपट दौड़ती ट्रेन दिखाई पड़े,मैं गिनूँ ट्रेन के डिब्बे, डिब्बों के पहिये
डिब्बों की खिड़की, जब कभी ऐसा होता था, मिलता था यात्रा का सम्पूर्ण फल,परंतु अब डरता हूँ कि सड़क पर, मिले नहीं रेल का फाटक,
क्योंकि होता है दोनों ओर स्पीड-ब्रेकर, फाटक हो तो बंद न हो क्योंकि, लोहे की रेल तो सरपट दौड़ती निकल जायेगी, किन्तु जीवन
की रेल जो ऑलरेडी हिचकोले खाती है, ठहर जायेगी।

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