खीदमतगार

किस तरह से पेश आऊ तेरी खिद़मत में ऐं हूज़ूर
मेरी शराफ़त से तो बल पड़ते है तेरी पेशानी मे
और दगाबाज़ो की चिकनी बाते तूझे सूकून देती हैं,,,,,
“””””विकास””””