गीत -रो रहा दिल मेरा है बिना आस के |

रो रहा दिल मेरा है बिना आस के |
जी रहा मैं प्रिये जैसे बिन श्वाँस के ||

रात बिन चाँद की चाँद बिन चाँदनी |
चाँदनी में न हो जैसे अब रोशनी ||
दूर हो मोरनी मोर से रूठकर |
नृत्य हो मोर का फिर बिना मोरनी |
प्रेम आराधना में हजारों मिटे ||
मर गए कितने चातक न जल पा सके ||

छाँव बिन बाग़ की लय हो बिन राग की |
हो मिलन जैसे कोई बिना फाग की ||
प्रियतमे बिन तुम्हारे यही है दशा |
दीप की थी दिवाली दिखी आग की ||
हम हुए हाय मायूस हैं इस कदर |
नृत्य हो कृष्ण का जैसे बिन रास के ||

सुर के बिन साधना जैसे संगीत की |
आरती अर्चना जैसे बिन गीत की ||
मीत की रीत से भीत हो मीत जब |
प्रार्थना वंदना जैसे बिन प्रीत की ||
दिल का गुलशन प्रिये मेरा जलता रहा |
अश्क बरसे मगर वो बुझा ना सके ||

क्यों तडप दिल रहा क्यों विकल रागिनी |
क्यों बनी थी प्रिये तुम मेरी कामिनी ||
नव रसों का जो ज्ञाता था नीरस हुआ |
है कडकती ह्रदय में कोई दामिनी ||
बिन नखत बेल के चाँद जैसे उगा |
कितनें टुकड़े किये तुमने विश्वास के ||

आचार्य शिवप्रकाश अवस्थी
9412224548

2 Comments

  1. Anmol tiwari Anmol tiwari 11/11/2014

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