राम शरण महर्जन की हाइकु-4

हाइकु
*-*-*-*

उड़ती पंछी
मृत्यु – बड़ा ही प्यारा
क्या निशाना है |१|

सुँघते फूल
लुटाकर यौवन
बात दोनों की |२|

उड़ते पत्तों
क्या है अप्ने ठिकाने
ईश्वर जाने |३|

लगे कर्मों में
टकराते कुकर्मों
आंखे लगे तो |४|

राम शरण महर्जन

Leave a Reply