झूठी ही सही

!! झूठी ही सही !!

किताब मैं रखा है आज भी वो तेरा दिया गुलाब !
एक निशानी मानकर,भले अब वो सुखा ही सही !!

एक-एक टुकड़े ने बयान की है मेरी असलियत !
गुरुर है मुझे उस दर्पण पे, भले वो टूटा ही सही !!

नजरे मिला कर चुरा ले इतना भी कम तो नहीं !
मेरा होने का सबूत तो है , मुझ से रूठा ही सही !!

दरमियाँ हमारे कुछ तो रहे,भले फासले ही सही !
दिल को तसल्ली तो है मिलन की,झूठी ही सही !!

क्या जरुरत पड़ी थी दूर जाने की तड़पने के लिए !
पास रहकर भी दूरिया तूने रखी थी,कम तो नही !!

भेज अगर देते कोई संदेशा,गैर के हाथो ही सही !
जीने की एक वजह तो मिल जाती झूठी ही सही !!

डी. के. निवातियाँ _________!!

2 Comments

  1. Rinki Raut Rinki Raut 14/12/2014
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 02/03/2015

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