‘शिव-शंकर’

भाव भक्ति भी मुझमें जगा दो। नाथ- महिमा अपनी बता दो॥ सभी मतों के इश्वर हैं एक। स्वरूप का प्रतिविम्ब दिखा दो॥ तू आदि दम्पति कहलाते हो। हिन्दू-मुस्लिम में माने जाते हो॥ परशुराम को परशु दिया है। मुझमें शिव शंकर भक्ति दे दो॥ सत्य स्वरूप मुझको दिखा दो। नित्य वह रूप अपना बता दो॥भाव भक्ति–॥

सारे लोक के पालन हारी। शिव-शंकर सुनलो त्रिपुरारी॥ रे!श्वास औ प्रश्वास वेद हौ। विद्याओं में मूल बतला दो॥ दर्शन से छुमंतर हो जाते। काल दोष- भगवन भगाते॥ महादेव -कहलाने- वाले! नाथ महिमा अपनी बता दो॥ भाव भक्ति भी मुझमें जगा दो। नाथ- महिमा अपनी बता दो॥सभी मतों–॥

विल्व पत्र का पान तू करते। रुद्राક્ષોં ने मंत्र महिमा जपते॥ विभीति से शिवजी शुभदायक। हैं सत्य सदा सबही कहते॥ शिव साક્ષાत्कार करे जो भी। परमानन्द प्राप्त करे ओ ही॥ आदि देव हो परम पुरुष हो। सत्य स्वरूप मुझको दिखा दो॥ भाव भक्ति भी मुझमें जगा दो। नाथ- महिमा अपनी बता दो॥सभी मतों–॥

गुरुओं के भी गुरू तुम्हीं हो। हृदय में निज જ્ઞાन जगा दो॥ सुलभ साध्य शिवदेव तुम्हीं हो। गौतम महर्षि को पूज्य तुम्ही हो॥ सालिग्राम शिव में विष्णु पूजा। बरदान महादेव हमे भी दे दो॥ शिव-शंकर ही सर्वश्रेष्ठ नाम हौ। प्रणव- पंचाક્ષरी- मंत्र बता दो॥ भाव भक्ति भी मुझमें जगा दो। नाथ- महिमा अपनी बता दो॥सभी मतों–॥

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