इंतजार उस परी का

इंतजार उस परी का
कब बुलावै यारब,
खयाल दिले-नादां को
क्या सुनावै यारब?
बात सुकूं की नहीं
हो गर सच-सच बोलना,
दास्तां कहाँ निकले कि
दिल बहलावैं यारब?
लिख देते उस हुस्न पे
अफ़साना हम भी,
हीले से किसी तो
अंदर बुलावैँ यारब।

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