ऐ वतन तेरे दामन

ऐ वतन तेरे दामन
कितनी मौत बाकी हैं,
अहले-मुल्क,किस सड़क से
फ़ासला बरतें?
लरजती हो जुबां ए आवाम जहाँ
दहशत से हनोज़,
ऐसे मसीहानफ़शां
किस सरकार से फ़ासला बरतें?
जहाँ हर आदमी
खन्जरआजमां हुआ हो दोस्त,
घर के दालान से निकल
किस सड़क से फासला बरतें?
गर मंजिल पे कत्ल की बू
आती हो तब क्या करें,
कौन सी मौत का
सामना करने से
फासला बरतें?
मुश्किल हो जिस सरकार को
बदरका अपना,
क्या मुश्किल,
अंदेशा-ए-संगे-मआल से
फासला बरतें?
ख़ार-ए-मजलूम सीधा
गले में अटकता है’मुकेश’,
भूख से न कहिए कि-
सुप्रीम कोर्ट से फ़ासला बरतें।

शब्दार्थ-
1-अहले-मुल्क/देशवासी
2-हनोज़/आज
3-मसीहानफ़शां/मुर्दो में जान फूकने वाले
4-बदरका/मार्गदर्शन
5-अंदेशा-ए-संगे-मआल/परिणाम के पत्थर का भय
6-ख़ार-ए-मजलूम/गरीब का कांटा

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