तुम्हारा रूप

तुम्हारा रूप, दशहरी आम, सुवासित क्षेत्र।
स्वच्छ सर मध्य, विकसता इंदु, बाल-रवि कान्ति।
श्रवण लघु कीट करे रोमांच, हृदय में प्यास।
पहुंच से दूर, क्षितिज पर शान्त, घनी घन पंक्ति।

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