कुछ यूँ होना

चंदा की तरह , यौम मुस्कराना
हवा की तरह , तुम मुझ में बहना

आहट तुम मेरे हृदय में यूँ देना
जैसे नई दुनिया मुझे पुकार रही हो

हाथ तुम अपना मेरे हाथ पर यूँ रखना
जैसे गुलाब हाथ पर रखा हुआ हो

नैन हम दोनों के , एक दूजे को कुछ कुछ कहते रहें
देख यह सारा वातावरण , तब कुदरत भी मुस्करा जाये

समय ढलते को देख , मैं कुछ खो न दूँ
तुम्हे अपना मैं , इश्क़ – ऐ – बयान मोहब्बत करूँ

तुम भी तब पलके अपनी झुका
मेरा प्रेम जरूर स्वीकार करना

तारों की जग मग मैं , चंदा की रौशनी मैं
रिस्ता हमारा यह , सभी को सुनहरा लगे

वापिस जब तुम घर की और मुडो गई
मुझे वायदा कभी न जुदा होने का तुम करना
इसी वादे से मैं तुम्हे विदा करूँ
उस पल का समय मेरे लिए कुछ ऐसा ही होना

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