हैदर

हम भारत के वीर जवान,
जनम देने वाली भी माँ नहीं रोक पाई,
हमें भारत माँ के आँचल मे समाने से,
ना सियाचिन की सर्द हवाओं से,
ना थार की धूल भरी आँधियों से,
अगर सिर हमारा झुका है तो बस,
अपने ही मुल्क के एक “हैदर” के आने से.

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