ना भुल पायेंगे

हमने तुमको चाहा है और चाहेंगे
तुम जानती हो, पहचानती हो
तुम भुल जाना लेकिन हम ना भुल पायेंगे

इक लगाव सा लगाया है, हमने दिलसे
इक प्यार सा है तुमसे, जो निबाना है
फिरसे
तुम वारती हो, सँवारती हो
तुम्हे मित माना है, यही हम नित मानेंगे
तुम भुल जाना लेकिन हम ना भुल पायेंगे

झंझा सा इक तूफान है, मेरे सिरपे
इस पार से जाना है, उस पार तैरके
तुम सारथी हो, पुकारती हो
तुम्हे जित माना है, यही हम रीत मानेंगे
तुम भुल जाना लेकिन हम ना भुल पायेंगे

रचनाकार/कवि~डॉ. रविपाल भारशंकर
(९८९००५९५२१)

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