प्यारी गुड़ीया

ऊचु चूचु सोनी चिड़ीया,
ऊलु लूलु प्यारी गुड़ीया
तेरे मन का भेद मै जानू,
जानु जानीया, जानु जानीया

प्यारी प्यारी, तु है न्यारी
इस बगीया की फुलवारी
चाहूँ तुझपे सांसे लुटाऊँ
बनके सुरीली बांसुरी
तु जो रूठे, ऐसा लगे
जैसे दिल पे चली हो छुरीया!

रचनाकार/कवि~ डॉ. रविपाल भारशंकर
(९८९००५९५२१)

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