प्रेम

जैसे सुर बिना ताल नही
उसी तरह प्रेम बिना जीवन नही

सूर्य बिना सवेरा नही
उसी तरह अन्धेरे बिना रात नही

प्रेम कहाँ नही है
ये कोई बात नही

माँ बेटे का प्रेम
बड़ा ही कोमल सा होता
जब बच्चा गिरता
तब माँ का दिल बहुत रोता

प्रेम के रंग मैं
हमारे कोई भगवान बने
श्री राधा कृष्ण जी
जो प्रेम की तस्वीर लगते

प्रेम भाव कहाँ नही है
स्नेह तो हर दिल मैं कुछ तो है
शिक्षक की दांत में प्रेम
ईस्वर और भगत में प्रेम

प्रेम रिस्ता बनता दो से
जैसे बाती संग दिया जले
बादल संग पानी बरसे
फिर ये दो से एक बने

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