वो बातें भी क्या बातें थी

अब रहने भी दे ये बातें
थी क्या बातें जो होती थी
कुछ हम आँखों से कहते थे
कुछ तुम आँखों से सुनती थी
वो खुश्क लबो के आहट सी
पलकों से बातें झड़ती थी
बे-लफ्ज़ वज़ह बतलाती थी
जो बातें दिल में होती थी
मै ग़म को छुपा के हस लेता
पर आँखे सब कह देती थी
वो बातें भी क्या बातें थी
जो ख़ामोशी में होती थी.

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