भ्रष्टाचार

आज भ्रष्टाचार इस कदर छाया है1
इंसान की रग-रग में समाया है 11
हर कोई दुसरो पर उंगली उठा रहा है 1
जबकि वो खुद इसमे समाता जा रहा है 11

बच्चा हो या बड़ा ,चपरासी हो या अधिकारी 1
नेता हो या अभिनेता ,या हो कोई व्यापारी 11

ईमानदारी का डंका बजाने वाले भी मजबूरी
में भ्रष्टाचार की कोख में समा रहे है
न चाहते हुए भी रिश्वतखोरों को रुपया ख़िला रहे है 1
रिश्वत न देने पर उनको इतना परेशान किया जाता है की
उनकी चप्पल भी घिस जाती है किन्तु काम नहीं हो पाता है 11

व्यापारी माल की कमी दिखाकर जहाँ दाम बढ़ा देता है 1
यह भी भ्रष्टाचार है जिससे वो औरो को दगा देता है 11

बच्चे को पैसे का लालच देकर जब माँ-बाप काम करवाते है 1
अनजाने में ही सही किन्तु प्यार में अंधे होकर वो स्वयं
उस बच्चे को भ्रष्टाचार करना सिखाते है 11

यह भी तो भ्रष्टाचार है मेरे भाई की ………….
हर कोई अपने स्वार्थ के लिए दूसरे को मूर्ख बना रहा है 1
और अपना काम निकल जाने पर उससे आँखे चुरा रहा है 11
जब भ्रष्टाचार की बातें करो तो ईमानदारी का फीता लगाकर
भ्रष्टाचार को राजनीति से जोड़ , अपने को साफ़ बता रहा है 11

आज जरुरत है हम स्वछता अभियान के साथ
मन की स्वछता का अभियान भी चलाये ताकि
अपने बुरे आचरण को दूर कर, भ्रष्टाचार को जड़ से मिटाये 11

3 Comments

  1. Hom Suvedi 05/11/2014
  2. Hom Suvedi 05/11/2014
    • Rajeev Gupta Rajeev Gupta 05/11/2014

Leave a Reply