ग़ज़ल

मेरे दिल ने भी कभी
दुआ की थी उनके लिए
जिसने छोड़ दिया मुझे
जमाने के लिए।
नशा अभी उतरा भी नहीं
उसके प्यार का
कि पीना पड़ा जाम
उसे भूलाने के लिए।।
शाम पड़े याद आ जाती हैं
वो हँसी उसकी
मचलने लग जाता है दिल
उसे पाने के लिए।
तभी याद करता हूँ
उसका वो जालिम चेहरा
जिसने बर्बाद किया था मुझे
किसींऔर को पाने के लिए।।