साथ-साथ तु, आस-पास तु

हरेक पल है साथ साथ तु
यही लगे है आस पास तु

तु इक लगाव है
गज़र में वक्त का बहाव है
सफर में रूख़ दे सके
वो मुक़ाम है तु
लगे है राहो में तलाश तु
यही लगे है आस पास तु

तु इक सवाल कर
शीपीयों में मोती है
हल्का कोई वार कर
नज़र मे रोशनी जगे
वो झंकार है तु
लगे सुखद कोई विलास तु
यही लगे है आस पास तु

तु आरपार कर
हटा दे अभ्र आसमांसे
तार तार कर
बिखरने जिस्मोजां लगे
वो इन्कार है तु
लगे ख़तम कोई खलास तु
यही लगे है आस पास तु

रचनाकार/कवि~ डॉ. रविपाल भारशंकर
(९८९००५९५२१)

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