तेरा नाम जो भी हो सुंदरी

तेरा नाम जो भी हो सुंदरी
सुंदरता का तु लफ्ज़ है आखरी

ना कोई गजरा, काजल झुमका
कहानीयों में सुना है ऐसी तु परी

तेरी बोली सरगमी बांसुरी, नैनो की चमक है चंदेरी
रूप का तु है खज़ाना, क्या देखु जमाना
तेेरे अंग-अंग में नजाकत है भरी

कहते है अभागन, होता है हुस्न दामन
कोई बहाना कभी ना बनाना, प्यार का  दिल में है नजराना
जिस्म के जंजाल से, परे है तु अगर

रचनाकार/कवि~ डॉ. रविपाल भारशंकर (९८९००५९५२१)

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