तु ही रे मेरी खुशी

आ जा तुझे दिल में उतारू, आ जा तेरे संग-संग सवारू
तु ही रे मेरी खुशी, तु ही रे है जिंदगी, तुझमें है जां बसी

कली, बेकली है, तेरे लिए; भली एकली है, तेरे लिए
अतर हो गयी है, सारी फिजा; खुली ये गली है, तेरे लिए
तु ही रे मेरी ख़ुशी, तु ही रे है जिंदगी, तुझमें है जा बसी

तु पराग माड़ी में बसता; भँवरे को मालूम है रस्ता
गुंजन बनके बालो में छिड़क दे; रहाई का है तुझे वास्ता
तु ही रे मेरी ख़ुशी, तु ही रे है जिंदगी, तुझमें है जा बसी

तु कोंपलों में है, तु डांठ में, तु शाख़ में है,
तु पात में
मैं चलते चलते कभी रूक गया, साया मिला मुझको सौगात में
तु ही रे मेरी ख़ुशी, तु ही रे है जिंदगी, तुझमें है जा बसी

रचनाकार/कवि~ डॉ. रविपाल भारशंकर (९८९००५९५२१)

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