नज़र आती है

दिल की गहराइयो में खुद की सच्चाइयाँ नज़र आती है
उनके दिल का खुदा जाने , हमें सिर्फ गहराइयाँ नज़र आती है

ढूंढते रहते है भूली बिसरी यादें , हिज़्र की रातों में .
हमें सिर्फ और सिर्फ परछाईया नज़र आती है

क्या थे क्या से क्या हुए , इस दिल के बाजार में
तमाम उम्र सफर किया तो , सिर्फ तन्हाईयाँ नज़र आती है

उम्र सफर का कम न था , बड़ी थकन हुई मंज़िल तक
जब आँख लगी तो , सपनो में सिर्फ अंगड़ाइयाँ नज़र आती है

अंजाम ऐसा था हरेक शक्श का , जो आशिकी करने चले
चार कन्धों पे उनकी विदाईया नज़र आती है

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