कीमत

इसी मुकाम पे समझा तमाम रिश्तों को
लगा रहा हूं जब अपने मकान की कीमत

बड़ा ग़ुरूर, बड़ी हैसियत, बड़ी बातें
अकाल हो तो समझते हैं धान की कीमत

बड़ी बाते ,बड़े बड़े घर,
बच्चो का देर से आना
डटो ,तो बाप का बेइज्जत हो जाना
तब समझ में आती है लगाम की कीमत

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